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कागजी मुद्रा का विकास युरोप में हुआ तथा वहीं से यह भारत में आया। 17वीं 18वीं शताब्दी वह दौर था जब भारत में कई राजनैतिक उथल पुथल हो रहे थे। इस दौर में मुग़ल काल का अंत व विदेशी राज की शुरुआत हो रही थी। इसी दौर में भारत का पहला बैंक नोट छपा था। अब तक की प्राप्त जानकारियों के अनुसार बैंक नोट को पहली बार बैंक ऑफ़ हिंदोस्तान (1770-1832) ने छापा था। आईये जानते हैं कागजी मुद्रा महत्‍वपूर्ण तथ्‍य - Paper money important facts 

कागजी मुद्रा महत्‍वपूर्ण तथ्‍य - Paper Money Important Facts in Hindi

बैंक नोटों के मुद्रण और वितरण का दायित्व 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक के हाथ में आ गया। जॉर्ज पंचम के चित्र वाले नोटों के स्थान पर 1938 में जॉर्ज षष्ठम के चित्र वाले नोट जारी किए गए, जो 1947 तक प्रचलन में रहे। भारत की स्वतंत्रता के बाद उनकी छपाई बंद हो गई और सारनाथ के सिंहों के स्तम्भ वाले नोटों ने इनका स्थान ले लिया, तब से यह आज तक शुरू है।

बैंक के नोट (Bank Note)


तकनीकी रूप से बैंक के नोट या केवल नोट एक बैंक द्वारा की गयी घोषणा है। इसमें बैंक घोषणा करता है कि मांगे जाने पर, बैंक उस नोट के धारक को उस नोट के मूल्य के बराबर धनराशि देने का वचन देता है। इसका उपयोग धन के रूप में होता है।

कागजी मुद्रा (Paper Money)

कागजी मुद्रा से तात्पर्य कागज पर बने विभिन्न अंकित मूल्य के उन नोटों से है जिसे देश का केंद्रीय बैंक अथवा सरकार जारी करती है कागजी मुद्रा को प्रतिनिधि मानक मुद्रा, अपरिवर्तनीय कागजी मुद्रा और आदेश कागज मुद्रा के रूप में वर्गीकृत किया गया है

प्रतिनिधि कागज मुद्रा (Representative paper currency)

प्रतिनिधि कागज मुद्रा वास्तव में पूर्ण मूल्य सिक्‍कों अथवा उनके बराबर के स्वर्ण बुलियन की मालगोदाम रसीद है जो प्रचलन में होती है इसे प्रतिनिधि पूर्ण मूल्य मुद्रा भी कहते हैं क्योंकि सरकारी खजाने में रखे स्वर्ण सिक्कों अथवा बुलियन से पूर्णतया समर्थित होती है 

परिवर्तनीय कागज मुद्रा (Convertible paper currency)

परिवर्तनीय कागज मुद्रा वह मुद्रा होती है जिसे मानक सिक्कों अथवा बुलियन के रूप में शत-प्रतिशत समर्थन प्राप्त नहीं होता है परंतु कागजी मुद्रा का धारक उसे मांग पर बिलियन अथवा सिक्कों में बदलवा सकता है

अपरिवर्तनीय कागज मुद्रा (Unchanging paper money)

अपरिवर्तनीय कागज मुद्रा वह मुद्रा होती है जिस कागजी मुद्रा को मानक सिक्कों अथवा बुलियन का कोई समर्थन प्राप्त नहीं होता और जिस में बदलाव भी नहीं किया जा सकता है उसे अपरिवर्तनीय कागजी मुद्रा कहते हैं सभी देशों के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी की गये नोट अपरिवर्तनीय मुद्रा होती है इसे प्रत्ययी मुद्रा (Fiduciary currency) भी कहा जाता है




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