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किसी भी व्यवसाय को चलाने के लिए धन की आवश्यकता होती है और इसी धन को व्यवसायिक भाषा में वित्त यानी फाइनेंस कहा जाता है Finance किसी भी व्यवसाय की पहली आवश्यकता है संपत्ति खरीदने के लिए याद दैनिक कार्य योग से संबंधित खर्चों के लिए या व्यवसाय को बढ़ाने के लिए व्यक्ति की आवश्यकता होती है यह वक्त हमें विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त होता है तो आइए जानते हैं वित्त के स्रोत कौन-कौन से हैं - वित्त के स्रोत - Sources of Finance 

वित्त के स्रोत - Sources of Finance

वित्त के स्रोत - Sources of Finance 


किसी भी व्यवसाय को चलाने के लिए जिस व्यक्ति की आवश्यकता होती है उसके सभी स्रोतों को मिलाकर दो वर्गों में बांटा गया है -
  1. संस्थागत स्रोत 
  2. गैर संस्थागत स्रोत

संस्थागत स्त्रोत - Institutional Sources

वह स्रोत होता है जो किसी भी काम के लिए ऋण देने के लिए बनाया गया होता है मुख्य रूप से किसी भी व्यवसाय के लिए वित्त की व्यवस्था करना इन संस्थाओं का उद्देश्य होता है इसलिए इन्हें वित्तीय संस्थाएं भी कहते हैं वित्तीय संस्थाओं में बैंक सहकारी समितियां बीमा कंपनियां भारतीय यूनिट ट्रस्ट राज्य वित्त निगम विकास बैंक आदि संस्थाएं आती है

गैर संस्थागत स्रोत Non-Institutional Sources

गैर संस्थागत स्रोत वित्त के वह स्रोत होते हैं जिनमें व्यवसायीी अपने स्तर से वित्त का इंतजाम करता है जिसमें वह अपने मित्रों साहूकारों महाजनों से वित्त का प्रबंध करता है यह सभी स्रोत वित्त के गैर परंपरागत स्रोत कहलाते हैं

किसी भी व्यवसाय को चलाने के लिए जिस पूंजी की आवश्यकता होती है उसका वर्गीकरण दो प्रकार से किया गया है पहला स्थाई पूंजी और दूसरी कार्यशील पूंजी स्थाई पूंजी वह पूंजी होती है जो किसी भी नए व्यवसायिक हो शुरू करते समय खर्च की जाती है जैसे भूमि खरीदने प्लॉट खरीदने अथवा मशीनरी खरीदने का यह पूंजी अधिकतर व्यवसाय के प्रारंभ में ही खर्च की जाती है कार्यशील पूंजी व पूंजी होती है जो व्यवसाय शुरू करने के बाद उसके दैनिक कार्य या उससे संबंधित खर्चों पर खर्च की जाती है जैसे मजदूरों का वेतन भवन का किराया मशीन की मरम्मत इत्यादि




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