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किसी भी काम को करने के लिए धन की आवश्‍यकता होती है उसी प्रकार व्‍यापारिक भाषा में कहा जाये तो किसी भी कम्‍पनी या फर्म का व्‍यवसाय करने में जिस धन की आवश्‍यकता होती है उसे वित्‍त कहते हैं। संस्‍थागत स्‍त्रोत वह होता है कि जब हम किसी काम को शुरू कर रहे होते हैं खासकर व्‍यापार के क्षेत्र में जब मुख्‍य रूप से किसी भी व्‍यवसाय के लिए वित्‍त की व्‍यवस्‍था करना इनका मुख्‍य कार्य होता है इसलिए इन्‍हें वित्‍तीय संस्‍थाएं कहते हैं। औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित वित्‍त के संस्‍थागत स्‍त्रोत - Institutional sources of finance related to industrial sector

औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित वित्‍त के संस्‍थागत स्‍त्रोत - Institutional sources of finance related to industrial sector

औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित वित्‍त के संस्‍थागत स्‍त्रोत - Institutional sources of finance related to industrial sector


देश के अन्‍दर उद्योग के लिए संस्‍थागत वित्‍त के निम्‍नलिखित स्‍त्रोत इस प्रकार है -
  1. लोक निर्गम( Public Issues)- किसी भी व्‍यक्ति को किसी विशेष कम्‍पनी या फर्म में पूंजी लगाने के लिए आमंत्रण देने की प्रक्रिया को लोक निर्गम कहते है और यह आमंत्रण कानूनी रूप से नियमों की तरह होते हैं इनमें नियमों तथा शर्तों का पूरा ब्‍यौरा दिया होता है तथा यह आमंत्रण सरकारी विभाग से मंजूरी के बाद ही दिया जाता है लोक निर्गम द्वारा वित्‍त की प्राप्ति शेयर व ऋण-पत्र जारी करके होती है जो शेयर खरीदता है उसे कम्‍पनी का मालिक कहते हैं, क्‍योंकि उसकी हिस्‍सेदारी कम्‍पनी में होती है कम्‍पनी के शेयर को खरीदने वालों को शेयरहोल्‍डर कहते हैं तथा इनकी संख्‍या कितनी भी हो सकती है।
  2. लोक जमाऍ ( Public Deposits)- लोक जमाओं में कम्‍पनी या फर्म जनता को यह आमंत्रण देती हैं कि जनता अपना पैसा उनके पास जमा करा सकती है तथा जमी की गई राशि पर एक निश्चित दर से ब्‍याज दिया जाता है यह अवधि एक साल से लेकर पॉच साल तक की हो सकती है तथा इसके लिए नियम रिजर्व बैंक जारी करती है ज्‍यादातर लोग अपना पैसा बड़ी-बड़ी कम्‍पनियों में लगाते है, क्‍योंकि उनको यह भरोसा होता है कि उनकी रकम नहीं डूबेगी।
  3. वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks)- वाणिज्यिक बैंक को व्‍यापारिक बैंक के नाम से भी जाना जाता है इन बैंकों का काम उद्योगों की अल्‍पकालीन जरूरतों को पूरा करना होता है यह बैंक लंबे समय के लिए ऋण नहीं देते है, क्‍योंकि इसमें रकम डूब जाने का जोखिम होता है।
  4. औद्योगिक बैंक( Industrial Banks)- औद्योगिक बैंक उद्योगों की आवश्‍यकता के अनुसार उद्योगों को दीर्घकालीन ऋण उपलब्‍ध कराती है इसका मुख्‍य कार्य ऋण देने के साथ-साथ उद्योगों का विकास करना है। औद्योगिक बैंक एक विशेष प्रकार की वित्‍तीय संस्‍था है जो कि सरकार द्वारा स्‍थापित होती हैं। 
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