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मुद्रामान (Monetary Standard) से आशय एक ऐसी व्‍यवस्‍था से है, जिसके अन्‍तर्गत किसी देश की मुद्रा का मूल्‍य व्‍यक्‍त किया जाता है, अर्थात् उस देश में जो भी मुद्रा वहां की सरकार या बैंक के द्वारा प्रचलित है उसका मूल्‍य व्‍यक्‍त किया जाता है, इसके अन्‍तर्गत विभिन्‍न देशों में प्रचलित मुद्राओं के पीछे रखी गई कोष निधि, उनकी परिवर्तनशीलता तथा उनसे संबंधित समस्‍याओं की जानकारी सम्मिलित रहती है और इसके साथ ही इसमें मुद्रा के कोष का आधार, मुद्रा निर्गमन संबंधी नियम, मानक तथा सांकेतिक मुद्रा निकालने संबंधी नियम एंव क्रियाएं आदि सम्मिलित किये जाते हैं। आईये जानते हैं मुद्रामान (Monetary Standard) के बारे में महत्‍वपूर्ण जानकारी 

क्‍या होता है मुद्रामान - What is Monetary Standard in Hindi

क्‍या होता है मुद्रामान - What is Monetary Standard in Hindi 

भारत में मुद्रामान (Monetary Standard in India)

स्‍वर्ण विनियम मान (Gold Exchange Standard)- भारत में स्‍वर्णमान की स्‍थापना के लिए 1898 ई. में फाउलर समिति (Fowler Committee) की नियुक्ति की गई। इसके सुझाव पर सरकार द्वारा 1899 ई. में ब्रिटिश सावरेन को विधिग्राहृा मुद्रा घोषित किया गया, किन्‍तु रूपया भी असीमि‍त विधिग्राहृा बना रहा। 
यह मान वर्ष 1914-15 तक चलता रहा, परंतु प्रथम महायुद्ध के बाद सरकार को स्‍पर्ण में रूपये की परिवर्तनशीलता समाप्‍त कर देनी पड़ी। इस प्रकार सवर्ण विनिमय मान टूट गया। 

स्‍वर्ण मानक को अपनाने की ति‍थियां

  • 1704: रानी ऐनी की घोषणा के बाद ब्रिटिश वेस्‍टइंडीज ने निजत इसे अपनाया। 
  • 1717: आईजैक न्‍यूटन द्वारा टकसाल के अनुपात के संशोधन के बाद किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन ने निजत: 22 कैरेट क्राउन गोल्‍ड में एक गिनी से लेकर 129.438 ग्रेन (8.38 ग्रा.) को अपनाया। 

भारत में पत्र चलन (Paper Currency in India)

  • वर्ष 1935 में देश में रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की स्‍थापना हुई। यह भारत के मौद्रिक इतिहास की महत्‍वपूर्ण घटना थी, क्‍योंकि पहली बार मुद्रा व साख दोनों का नियन्‍त्रण एक ही संस्‍था के हाथ में आया। 
  • भारत में सबसे पहले ब्रिटिश सरकार ने बैंक ऑफ बंगाल को नोटों की निकासी का अधिकार दिया। बाद में नोटों के निर्गमन का एकमात्र अधिकार रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया को 1 अप्रैल, 1935 को दे दिया गया। 

मुद्रामान से जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य

  • 1933 में अमेरिका तथा 1936 में फ्रांस ने स्‍वर्णमान को त्‍याग दिया। 
  • विनियम दर में अस्थिरता आने के कारण 1936 में इंग्‍लैंड, अमेरिका तथा फ्रांस ने एक त्रिपक्षीय समझौता किया, जिसमें नीदरलैंड, बेल्जियम तथा स्विट्जरलैण्‍ड भी शामिल हो गए। 
  • भारत सरकार द्वारा जारी किए गए ट्रेजरी बिल को निकट मुद्रा की श्रेणी में रखा जाता है। 
  • जीवन बीमा पॉलिसी एक निकट मुद्रा है तथा तरल परिसम्‍पत्ति का एक रूप है। 
  • चेकों, हुण्डियों और प्रनोटों आदि के रूप में प्रचलित मुद्रा, अवैध मुद्रा होती है।
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