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मुद्रास्फीति का अर्थ (Meaning of Inflation) वस्तु एवं सेवाओं की कीमत के स्‍तरों में लम्‍बे समय तक होने वाली वृद्धि। अगर बात आम भाषा में की जाये तो मुद्रास्‍फीति (Inflation) वह होती है कि जब मूल्‍य की क्रय शक्ति कम हो जाती है अर्थात् मुद्रा के मूल्‍य में कमी आ जाती है। सामान्‍य स्‍तरों में इसका संबंध महंगाई से होता है, इसलिए सामान्‍य बोलचाल की भाषा में मंहगाई को ही लोग मुद्रास्‍फीति कहते हैं। आईये विस्‍तार से जानते हैं मुद्रास्फीति क्या है - What is Inflation in Hindi 

मुद्रास्फीति क्या है - What is Inflation in Hindi

मुद्रास्फीति क्या है - What is Inflation in Hindi 

मुद्रास्‍फीति का शाब्दिक अर्थ होता है मुद्रा के मूल्‍य में कमी। मुद्रास्‍फीति के दो कारण होते हैं पहला मुद्रा के प्रसार में वृद्धि तथा दूसरा वस्‍तु के उत्‍पादन में कमी। 

मुद्रास्फीति के प्रकार (Type of Inflation)

मुद्रास्‍फीति के अनेक रूप हो सकते हैं। स्‍फीति को विभिन्‍न आधारों-दर, कारण आदि पर वर्गीकृत किया जा सकता है। प्राय: स्‍फीति के निम्‍नांकित रूपों की चर्चा की जाती है - 
  • रेंगती या नम्र स्‍फीति (Creeping or Moderate Inflation) - रेंगती या नम्र स्‍फीति तब होती है जब स्‍फीति की वार्षिक दर एक अंक में हो, तो इसे नम्र या रेंगती स्‍फीति कहते हैं। इस स्‍फीति की एक खास बात यह होती है कि इसका पूर्वाभास हो जाता है जिससे की आने वाली समस्‍याओं के प्रति नीतियों का निर्धारण किया जा सकता है। 
  • लागत जन्‍य स्‍फीति (Cost Push Inflation) - जब किसी भी वस्‍तु की लागत में वृद्धि आती है और वस्‍तुओं की पूर्ति में अत्‍यधिक कमी के कारण मूल्‍य स्‍तर में वृद्धि आए, तो इस प्रकार की स्‍फीति को लागत जन्‍य स्‍फीति कहते हैं। 
  • माँग प्रेरित स्‍फीति (Demand Pull Inflation) - जब समग्र पूर्ति की अपेक्षा समग्र मांग को प्रभावित करने वाले कारक अधिक प्रभावी हों और मांग पूर्ति से अधिक हो जाए तो इसे मांग प्रेरित स्‍फीति (Demand Pull Inflation) कहते हैं। 
  • कूदता या गैलोपिंग स्‍फीति (Galloping Inflation) - सैम्‍युलसन यह मत व्‍यक्‍त करते हैं कि यदि स्‍फीति की वार्षिक दर दो अंकीय या तीन अंकीय हो। जैसे- 20, 100, 200%, तो इसे गैलोपिंग स्‍फीति कहते हैं। गैलोंपिंग स्‍फीति में स्‍फीति की वार्षिक दर अत्‍यन्‍त ही ऊँची होती है। 
  • खुली एवं दबी स्‍फीति (Open and Suppressed Inflation) - खुली एवं दबी स्‍फीति में किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं होता है तथा मूल्‍य स्‍तर स्‍वत: बिना रोक-टोक के ऊपर आ जाता है, तो इस प्रकार की नीतियों के द्वारा मूल्‍य स्‍तर को एक सीमा में रखने की कोशिश करें और मूल्‍य स्‍तर उतना ऊँचा नहीं दिखाई दे जितना वह वास्‍तव में है। इस स्थिति में स्‍फीति के लक्षण तो रहते हैं, पर उभरकर ऊपर नहीं आते हैं। 
  • अधिस्‍फीति या हाइपर स्‍फीति (Hyper Inflation) - अधिस्‍फीति में स्‍फीति की दर तीन अंकों से भी बहुत अधिक हो जाती है उसे अधिस्‍फीति कह‍ते हैं। हाइपर स्‍फीति की स्थिति में पत्र-मुद्रा बिल्‍कुल बेकार हो जाती है, मुद्रा से लोगों का विश्‍वास खो जाता है। 
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