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मुद्रा बाजार (Money Market) वित्‍त से जुड़ी प्रणाली का एक अंग है, जहां वित्‍त से जुड़ी राशियों का लेन-देन होता है। अर्थात् एक ऐसा स्‍थान जहां पर वित्‍त के द्वारा या वित्‍त के किसी भी अन्‍य रूप के द्वारा हम किसी भी वस्‍तु को क्रय कर सकते हैं या विक्रय कर सकते हैं। आईये जानते हैं मुद्रा बाजार (Money Market) के बारे में अन्‍य महत्‍वपूर्ण तथ्‍य - क्‍या है मुद्रा बाजार - What is Money Market in Hindi

क्‍या है मुद्रा बाजार - What is Money Market in Hindi

क्‍या है मुद्रा बाजार - What is Money Market in Hindi

भारतीय मुद्रा बाजार (Indian Money Market) में अल्‍पकालीन समय के लिए राशियों का उधार लेन-देन किया जाता है। भारतीय मुद्रा बाजार को साख बाजार भी कहा जाता है और इसके अंतर्गत सामान्‍यत: बैंकों को शामिल किया जाता है। 
  • जहां पर अल्‍पकालीन प्रतिभूमियों का क्रय-विक्रय होता है और उधार लेने वाली संस्‍थाएं एवं उधार देने वाली संस्‍थाएं परस्‍पर आपस में प्रतिभूमियों का लेन-देन करती हैं। ये अल्‍पकालीन प्रतिभूतियां तरल स्थिति में होती है। इनके लेन-देन में हानि की संभावना नहीं होती है। 
  • मुद्रा बाजार में लेन-देन नकदी या मुद्रा में नहीं, बल्कि साख प्रलेखों के रूप में होता है। विनिमय पत्र, प्रतिज्ञा पत्र, वाणिज्यिक पत्र, ट्रेजरी बिल आदि साख प्रलेखों के उदाहरण हैं। 
  • भारतीय मुद्रा बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक, वाणिज्यिक बैंक, सहकारी बैंक, अन्‍य वित्‍त संस्‍थाएं व गैर-बैकिंग वित्‍त कम्‍पनियां और वित्‍तीय संस्‍थाएं जैसे- भारतीय जीवन बीमा निगम, यूनिट ट्रस्‍ट ऑफ इण्डिया आदि भी शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा बाजार की शीर्ष संस्‍था है, जो देश में मौद्रिक व बैकिंग परिस्थितियों का नियन्‍त्रणकर्ता व सर्वोच्‍च मौद्रिक आधिकारिक है 

भारतीय मुद्रा बाजार के प्रकार (Type of Money Market)

भारतीय मुद्रा बाजार को संगठित और अंसगठित क्षेत्र में वर्गीकृत किया गया है। मुद्रा बाजार के संगठित क्षेत्र में वाणिज्‍य बैंक जिसमें निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को शामिल किया गया है और मुद्रा बाजार के अंसगठित क्षेत्र में देशी बैंकर, महाजन और गैर बैंकिंग वित्‍तीय संस्‍थाओं को शामिल किया गया है।

भारतीय मुद्रा बाजार की संरचना निम्‍नलिखित है - 
  1. संगठित क्षेत्र (Organised Sector)- इस क्षेत्र के तहत रिजर्व बैंक, जोकि देश का केन्‍द्रीय बैंक है, के अलावा सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंक तथा विदेशी विनियम बैंक आते हैं। 
  2. असंगठित क्षेत्र (Unorganised Sector)- इस क्षेत्र के अन्‍तर्गत देशी बैंकर तथा मुद्रा उधार देने वाले विभिन्‍न व्‍यक्ति आते हैं, जिन्‍हें देश के विभिन्‍न भागों में साहूकार, महाजन आदि नामों से जाना जाता है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्‍हें किसी वित्‍तीय संस्‍था द्वारा वैधानिक मान्‍यता प्राप्‍त नहीं होती।
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